एक सच्ची जिंदगी के संघर्षों की कहानी

जिंदगी एक रेस(दौड़) है ।संसार एक मैदान है अब तैयारी आपको करनी है क्योंकि दौड़ आपका कोच भी आपको नही जीत सकता है बो आपको सीखा सकता जीता नही इसलिए दुसरो पर निर्भर न हो कर खुद से जीतने तैयारी करिए । एक बार गिरो दो बार गिरोगे उठना सीख जाओगे ।अगर दुसरो के कंधों पर बैठ के चलोगे धड़ाम से गिरोगे उठ भी नही पाओगे।दौड़ के मैदान पे अपने से आगे बाले पे सब नज़र रखते है दुनिया भी उसी को देखती है ।पीछे बाले पर गौर नही करता ।दुनिया ,रिश्ते,लोग आपकी जीत पे आपको अपना बनाएंगे क्योंकि हारने के बाद नही तुमसे जीतने का तरीका पूछने आएंगे क्योंकि आज जिस मैदान में आप है कल बो भी तो जयेंगे बो अपना दाव लगयेंगे क्योंकि न तो आप न बो आपको अपना खिताब दे जयेंगे ।जो जीत चुके है बो भी तुमसे आगे रहना चाहेंगे और अगर बो दौड़ चुके होंगे अगर आपको भी उस जगह देखने चाहेंगे तो आपको उपाय बताएंगे ।सिर्फ आपके माँ बाप ही आपको आगे देखना चाहेंगे पूरा प्रयास लगयेंगे ।आपको सब सीखएँगे हर संभव प्रयास बताएंगे । इतना ही तो कर पाएंगे बो थोड़ी तुम्हारी जगह दौड़ने जयेंगे । वो तो जीत चुके है आपको जिताएंगे । ये आप पे निर्भर करता है कि आप उनका मन बढ़ाएंगे या फिर उनके पैसों से ऐश आराम फरमाएंगे । अगर अभी ऐश फरमाएंगे तो बाद में पछतायेंगे तो बाद में पछतायेंगे अगर अभी संघर्ष कर जयेंगे तो जिंदगी भर आनंद कर पाएंगे आगे और बढ़ जयेंगे दुसरो को भी नुस्खे बता पाएंगे ।नही तो खुद कुछ नही करेंगे तो दूसरों को कब तक पागल बनाएंगे देखते रहना आपके अपने ही आपकी नाकामी सबके सामने लाएंगे फिर आप क्या कह पाएंगे। जिंदगी है आप दौड़ लगएँगे आप एक न एक दिन जीत जयेंगे ।अगर आप जीतेंगे तो आप ही आराम फरमाएंगे अपनी जीत खिताब किसी और को थोड़ी देने जयेंगे । आप संघर्ष करंगे आप बढ़ेंगे अपने माँ बाप का मन बढ़ाएंगे। धन्यवाद ।।लेखक सचिन यादव

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